Saturday, January 10, 2009

गुनगुनी धूप में गुटरगूं - संचार क्रांति के हानि - लाभ

वीरू अब पानी की टंकी पर नहीं चढ़ते। शहर की लगभग हर चौथी इमारत की छत पर उग आये वैध-अवैध मोबाइल टॉवर बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं।

संचार-क्रांति के प्रत्यक्ष प्रमाण बनकर गर्व से तने हुए इन टॉवर्स ने चिट्ठी-पत्री को लगभग पूरी तरह चलन से बाहर कर ही दिया है। इनकी वजह से बेरोजगारी पर बाध्य ओरिजिनल संदेशवाहकों (कबूतरों) को इन की बढ़ती संख्या से आपत्ति होनी ही थी। विरोध-स्वरूप सभा का आयोजन तय हुआ तो स्वयं इस विराट लौह-जालों से अच्छी जगह कहाँ मिलती?

कोहरे में डूबी सुबहों और शामों के बीच दोपहर की हल्की गुनगुनी धूप मे पंख खोलने का मौका मिला तो सभा में उपस्थिति भी अच्छी दर्ज हुई। इस अवसर की दो तस्वीरें पेश हैं। घटना इसी जनवरी की है।



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