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Sunday, May 11, 2008

अमिताभ बच्चन की एक कविता

सर्वप्रथम तो आप सभी स्नेहिजनों का हार्दिक धन्यवाद जो इस ब्लॉग को ऐसा स्वागत मिला. लेकिन साथ ही इतने लंबे अंतराल के लिए क्षमा प्रार्थना भी. पिछले तीन दिन से यात्रा में था. अवसर मिला था वृन्दावन-गोकुल-मथुरा की पावन स्थली को पहली बार देखने का, तो ब्लॉग जगत से अनुपस्थिति रही. यात्रा के खट्टे-मीठे अनुभव संजो कर कल देर रात ही लौटना हुआ.

अमिताभ बच्चन का ब्लॉग जब से अस्तित्व में आया है, लगातार चर्चा में बना हुआ है. कोई ना कोई विवाद लगातार जुड़ता रहा है. कई लोगों ने अमिताभ द्वारा अंग्रेजी में ब्लॉग लिखने पर भी अपनी निराशा जताई. ब्लॉग जगत में भी गूँज सुनाई दी। बामुलाहिजा कटाक्ष किए गए.हिन्दी के विख्यात कवि डॉ हरिवंशराय बच्चन के पुत्र जो स्वयं हिन्दी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुए, हिन्दी में ना लिखें तो आलोचकों को अवसर तो देंगे ही. अब समाचार आ रहा है कि वे जल्द ही हिन्दी में भी लिखना प्रारम्भ करेंगे.

वास्तव में अमिताभ भी उसी श्रेष्ठी वर्ग से हैं जिसका चिंतन मनन अंग्रेजी में ही आकार लेता है. प्रमाण है उनकी लिखी यह कविता जो उन्होंने अपनी बीमारी के कष्टकारी दिनों में ब्रीच केंडी हॉस्पिटल के गहन चिकित्सा कक्ष से लिखी थी. कहते हैं घोर कष्ट या परम आनंद के क्षणों में इंसान अपनी भावनाएं अपनी मातृभाषा में ही व्यक्त करना सहज पाता है. तो इसका क्या अर्थ लगाया जाए, यही ना कि अमिताभ की प्रथम भाषा अंग्रेजी ही है.

वैसे व्यक्तिगत रूप से हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है कि वे किस भाषा को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाना पसंद करते हैं. भाषा द्वितीय है भाव प्रथम. अमिताभ एक अच्छे लेखक हो सकते हैं. जैसा कि बच्चन जी ने एक बार कहा था, "जब कभी अमिताभ अपनी आत्म कथा लिखेंगे और लोग उनकी लेखनी से परिचित होंगे तो शायद मुझे भूल जायेंगे." अभी तक तो जो कुछ सामने आया है उसमें विवाद को न्योतने के सिवाय कुछ विशेष नहीं है. आशा करना चाहिए कि आगे कुछ बेहतर भी पढने को मिलेगा.

आप पढिये अमिताभ की ये कविता और साथ ही हरिवंश राय बच्चन जी का किया हुआ अनुवाद. (बच्चन जी की आत्म कथा के चौथे खंड 'दशद्वार से सोपान तक' से लिया गया.)

Breach Candy Hospital
I.C.U. Room No. 1 - Bombay
29th August 1982

Outside - Inside

Outside-
Black
Granite ugly rocks,
Turbulent mud-laden sea
Dark frightening clouds hovering above

Inside-
Whiteness, purity
Clean sheets, soft pillows
Gentle care, soft words
Solitude
And my agony.

- Amitabh Bachchan

'बच्चन' जी का किया अनुवाद-

बाहर-
ऊपर, मंडराते, डरपाते
अंधियाला छाते-से बादल
नीचे, काली, कठोर, भद्दी चट्टानों पर
उच्छल, मटमैली जलधि-तरंगों की क्रीड़ा

भीतर-
सब उज्जवल, शुद्ध, साफ
चादर सफ़ेद, कोमल तकिये,
धीमे-धीमे स्वर से सिंचित
ममतामय सारी देख-रेख
औ' मेरी एकाकी पीड़ा.
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ब्रीच केंडी हॉस्पिटल समुद्र तट पर है और ICU के कमरे से समुद्र का तटीय दृश्य दिखाई देता है. बरसात का मौसम था.

है ना सुंदर कविता? दिखता है यथार्थ, भोगा हुआ, सच्चाई से परिपूर्ण.

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