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Thursday, September 18, 2008

तैयार रहिये अपने ब्लॉग पर टिप्पणियों की बरसात के लिए

ब्लॉग जगत में टिप्पणियों की महत्ता से सभी परिचित हैं. एक ब्लॉगर के लिए पाठकों की (पढिये दूसरे ब्लॉगरों की, विशुद्ध पाठक कौन धरे हैं यहाँ?) टिप्पणियों का क्या महत्त्व है, ये किसी से छुपा नहीं है. कई लोग तो खुलकर स्वीकार करते हैं पोस्ट लिखने के तुरन्त बाद से ही उन्हें टिप्पणियों का इन्तजार लग जाता है. हर दस-पन्द्रह मिनिट के बाद अपने चिट्ठे पर जाकर झांकते हैं कि कोई टीपने आया अथवा नहीं. कुछ अन्य लोग जो अपनी टिप्पणी लालसा के प्रदर्शन में जाहिर तौर पर हिचकते हैं, अपने टिप्पणी बक्से के संदेश में उन्होंने भी 'टिप्पणियों का स्वागत है' टाइप वाक्यांश लगा रखे हैं. आख़िर कौन नहीं चाहता कि उसे ज्यादा से ज्यादा टिप्पणियां मिलें?

लेकिन टिप्पणियां पाना इतना भी आसान काम नहीं. इसके लिए बहुत मेहनत की दरकार होती है. पहले तो ये कि आप को अच्छा और रोचक लिखना आना चाहिए. किसी ऐसे विषय पर आपकी पकड़ होनी चाहिए जिसमें लोगों की रूचि हो. दूसरे ये भी कि अपनी पोस्ट (और चिट्ठे) का प्रचार करना आना चाहिए, अब कोई फ़िल्म कितनी भी अच्छी क्यों न बनी हो, बिना पब्लिसिटी के हिट हो सकती है क्या? बिल्कुल नहीं. तो आप अपनी पब्लिसिटी कैसे करते हैं? इसका सबसे आसान तरीका है, दूसरों के चिट्ठों पर टिपियाना. अगर अगले में थोड़े भी सोशल एटिकेट्स होंगे, तो भागा हुआ आएगा आपका टिप्पणी ऋण चुकाने.

लेकिन बात सुनने में आसान लगने के बावजूद ऐसी है नहीं. आख़िर एक दिन में आप कितनी पोस्ट पढ़ सकते हैं? बीस, पच्चीस. फ़िर कितने पर टिपिया सकते हैं? क्या आपके चिट्ठे की सेहत के लिए इतनी संख्या काफी है? जवाब है, बिल्कुल नहीं. ऊपर से लोग भी समझदार हो चले हैं. अगर आप बिना पढ़े टिपिया दिए, तो झट से ताड़ जाते हैं. पलट कर टिपियाना तो दूर की बात उल्टे और लोगों से आपकी शिकायत करते हैं. अब क्या किया जाए?

परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं. अब घोस्ट बस्टर लेकर आए हैं, आपकी सभी टिप्पणी सम्बंधित समस्याओं का आसान और प्रभावशाली निदान: स्वतः टिप्पणी रचक (ऑटो कमेन्ट जनरेटर) सॉफ्टवेयर, "टॉप-टीप". इस की मदद से आप जब चाहें, जिस भी ब्लॉग पर चाहें टिपियाते रह सकते हैं, बिना किसी पोस्ट को पढ़े. बस आपको अपना कंप्यूटर (और ये सॉफ्टवेयर) चालू रखना होगा. जी हाँ, यही है आज के हर समझदार ब्लॉगर की पहली पसंद, अब आपके लिए भी उपलब्ध. पिछले दो वर्षों से इसके बीटा वर्जन की टेस्टिंग चल रही थी. कुछ वोलंटीयर्स (इन्हें तो आप जानते ही हैं) के अनुभवों के आधार पर हमने इसे और बेहतर बनाने का कार्य किया है. आज ही इसका ट्रायल वर्जन डाउनलोड कीजिये और ख़ुद आजमा कर देखिये.

"टॉप-टीप" कैसे कार्य करता है?

मुख्य रूप से इसके तीन मोड ऑफ़ ऑपरेशंस हैं.

१) फास्ट मोड (कम समय में ज्यादा लाभ) -

इसमें आपको पहले से तैयार एक टिप्पणी बैंक दिया जाता है. आपको करना सिर्फ़ ये होता है कि चिट्ठे के URL के साथ अपनी मनपसंद की कुछ टिप्पणियों को असोसिएट कर दें. जब भी इस चिट्ठे पर कोई नयी पोस्ट आयेगी, तो आपकी चुनी हुई टिप्पणियों में से कोई भी एक टिप्पणी उस पोस्ट पर चेंप दी जायेगी.

इस मोड का इस्तेमाल किन चिट्ठों पर करें?

ये मोड उन चिट्ठों के लिए बेहतरीन उपाय है जहाँ केवल एक ही तरह की पोस्ट लिखी जाती हैं. जैसे कि कविताओं-कहानियो वाले चिट्ठे, फिल्मी/गैर फिल्मी गीतों के पौड्कास्ट वाले चिट्ठे, एकरसता से भरपूर तथाकथित संवेदनशील पोस्ट पेलने वाले चिट्ठे वगैरह वगैरह, जहाँ पोस्ट मैटर लगभग हमेशा ही एक जैसा ही रहता है.

इस मोड का लाभ -

गति. इस मोड में आप प्रति मिनिट दो से तीन टिप्पणियां कर सकते हैं, चूंकि टिप्पणी पहले से ही तैयार रहती हैं. यदि आपके पास समय कम है तो ये मोड़ बड़े काम का है. केवल पन्द्रह मिनिट में आप पैंतीस-चालीस पोस्ट्स पर टिप्पणियां भेज सकते हैं.

कुछ सेम्पल एप्रोक्सिमेट टिप्पणियां:

१. वल्लाह! क्या बात है.
२. लाजवाब लिखा है आपने.
३. इन मुद्दों के प्रति आपकी संवेदनशीलता अद्भुत है.
४. मन को कहीं भीतर तक छू गयी ये रचना.
५. काफी कुछ सोचने पर मजबूर करती है आपकी ये पोस्ट.

२) इफेक्टिव मोड (धीमा परन्तु ज्यादा प्रभावकारी) -

यदि आप दूसरे ब्लॉगर पर अपनी टिप्पणी का ज्यादा गहरा प्रभाव छोड़ना चाहते हैं तो एक बिल्कुल व्यक्तिगत किस्म की टिप्पणी के लिए यह मोड बिल्कुल उपयुक्त है. इस मोड में हमारा सॉफ्टवेयर न्यूरो फजी लॉजिक का इस्तेमाल करते हुए ऐसी कमाल की टिप्पणी रचता है कि आप ख़ुद उसे पढ़कर दंग रह जायेंगे. इसके लिए ये पोस्ट को पढ़कर उसमें से कुछ की-वर्ड्स छांटता है. पूरी पोस्ट का खाका समझने के बाद ये अपनी टिप्पणी रचता है. उस पोस्ट पर आए अन्य कमेंट्स तो नजर में रखे ही जाते हैं, कभी-कभी आवश्यकता होने पर पोस्ट में से या किसी पिछले कमेन्ट में से कोई वाक्य उद्धृत भी करता है.

कहाँ प्रयोग करें?

जिन ब्लॉग्स पर विषय की विविधता होती है, और जहाँ गंभीर किस्म का चिंतन चलता है. ऐसे ब्लॉग्स पर केवल सतही टिप्पणी आपके मूल उद्देश्य (यानी रिटर्न टिप्पणी पाना) की पूर्ति नहीं कर सकती. तो आपको वहां इस मोड को काम में लेना चाहिए. इसे वहां भी परख सकते हैं जहाँ केवल एक ही किस्म की पोस्ट होती हैं, जैसे कि राजनीतिक विश्लेषण या व्यंग्य, लेकिन नामी ब्लॉगरों द्वारा. वहां भी इन बड़े विद्वानों के बीच केवल एक लाइन की टिप्पणी देंगे तो कोई आपको नोटिस भी नहीं करेगा. अगर रिटर्न टिप्पणी की गारंटी चाहिए तो आपको अपना बुद्धि कौशल दिखाना ही पड़ेगा.

इस मोड के लाभ-हानि:

लाभ तो जाहिर ही हैं. आपकी विद्वत्ता और जानकारियों की धाक जमेगी. आपके ब्लॉग पर ज्यादा ट्रैफिक आएगा. हानि केवल यह है कि एक टिप्पणी में तीन से पाँच मिनिट का समय लगता है. इस प्रकार केवल बीस-पच्चीस टिप्पणियों में ही घंटे भर से ज्यादा समय लगेगा. आपको अपना कंप्यूटर ऑन रखना होगा. हलाँकि आप चाहें तो इस दौरान कोई किताब पढ़ सकते हैं या कोई भी अन्य काम कर सकते हैं.

सेम्पल टिप्पणियां:

इस मोड की टिप्पणियां पोस्ट पर आधारित होती हैं. डिटेल में समझाने के लिए यहाँ पोस्ट को भी देना पड़ेगा, और कुछ गलतफहमियां खड़ी हो सकती हैं. इसलिए कोई सेम्पल नहीं दे पा रहे हैं. आप स्वयं सॉफ्टवेयर में ही टेस्ट करके देखें.

३) स्पेशल मोड (एक अलग अप्रोच) -

इस मोड की टिप्पणियों का पोस्ट से कोई खास लेना-देना नहीं होता. वे इस बात पर निर्भर करती हैं कि उस ब्लॉगर से आपके कैसे व्यक्तिगत सम्बन्ध हैं और उस ब्लॉगर की पिछली पोस्ट्स पर आप क्या कमेन्ट देते रहे हैं. इस स्पेशल मोड में किसी भी चिट्ठे के प्रति आप तीन लेवल सेट कर सकते हैं: सपोर्ट, अपोस या न्यूट्रल. आपके सेट किए गए लेवल के आधार पर हमारा अत्याधुनिक और इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर अपने आप तर्क-वितर्क पूर्ण टिप्पणियां चुन कर उन्हें पोस्ट पर चिपका देगा. आपका उद्देश्य पूरा हो जायेगा.

अभी हाल ही में हमने अपने उत्पाद में एक और जबरदस्त फीचर को शामिल किया है जिसे हमने
नाम दिया है 'हवा का रुख'. अगर आप चाहें तो सैटिंग्स को इस प्रकार एडजस्ट कर सकते हैं कि आपकी टिप्पणी उस लेख पर आपसे पहले आयी टिप्पणियों का ही अनुगमन करेगी. इसके लिए हमारा शानदार सॉफ्टवेयर इस बात की पड़ताल करता है कि आपसे पहले की टिप्पणियों का स्वर किस दिशा में है. विरोध और समर्थन को प्रतिशत में तौलते हुए वह आपकी टिप्पणी तैयार करता है. पचास प्रतिशत से ज्यादा टिप्पणियां जिस दिशा में हों, उसी स्वर में आपकी भी टिप्पणी लिख दी जाती है. लेकिन किसी पोस्ट पर इस फीचर का उपयोग करने के लिए आवश्यक है कि उस पोस्ट पर कम से कम सात टिप्पणियां पहले से मौजूद हों.

तो देखा आपने कितने काम का है हमारा ये स्वतः टिप्पणी रचक सॉफ्टवेयर, "टॉप-टीप". तो अब इन्तजार कैसा? तुंरत इसका फुली फंक्शनल ट्रायल वर्जन डाउनलोड कीजिये और ख़ुद आजमा कर देखिये.

ट्रायल वर्जन लिमिटेशन: हर दसवीं टिप्पणी के अंत में ये शब्द जोड़ दिए जायेंगे:
"यह टिप्पणी "टॉप-टीप" सॉफ्टवेयर की मदद से की गयी है."
एक बार आप सॉफ्टवेयर को हमारे यहाँ रजिस्टर करवा लेते हैं तो आपको एक कोड भेज दिया जायेगा, जिसे "टॉप-टीप" में भरकर आप इस नेग से निजात पा सकते हैं.
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पुनःश्च: हमारा सॉफ्टवेयर अभी वर्ड वेरिफिकेशन की दीवार को फांदने में सक्षम नहीं है. ऐसे चिट्ठों पर आपको मेन्युअली ही कमेन्ट करने होंगे. इस असुविधा को टरकाने के लिए लोगों से अनुरोध करते रहें कि वे वर्ड वेरिफिकेशन को अपने चिट्ठों से तुंरत हटा लें. (वैसे हम इसका कोई परमानेंट उपाय ढूँढने में लगे हुए हैं. अगले वर्जन में इसे भी शामिल कर लिए जाने की उम्मीद है.)

Monday, July 14, 2008

ऑपेरा ब्राउजर हमारी पहली पसंद क्यों है?

काफ़ी सारी काम की जानकारियाँ जो साइटमीटर उपलब्ध करवाता है, उनमें से एक है आपके ब्लॉग पर आने वाले ट्रैफिक का ब्राउजर उपयोग. हमने पाया कि इस ब्लॉग पर आने वाले ६०% लोग इंटरनेट एक्सप्लोरर का प्रयोग कर रहे हैं. और भी ज्यादा अचरज यह देखकर हुआ कि ४१% लोग अभी भी तकनीकी रूप से अति दुर्बल IE-६ या उससे भी पुराने वर्जन पर टिके हैं.

दुनिया भर में वेब ब्राउजर्स का मार्केट शेयर देखें तो इंटरनेट एक्स्प्लोरर का साम्राज्य पहले की तुलना में भले ही कमजोर हुआ हो पर अभी भी लगभग पैसठ प्रतिशत के साथ निर्विवाद रूप से कायम है. दूसरे नंबर पर फायरफॉक्स लगभग बीस प्रतिशत के साथ काफी पीछे है. बाकी पन्द्रह प्रतिशत में अन्य सभी सिमट जाते हैं.

मुझे थोड़ा आश्चर्य होता है. बेहतरीन फीचर्स के साथ जब आधुनिक ब्राउजर्स मुफ्त में उपलब्ध हैं तो लोग इनका उपयोग क्यों नहीं करते? शायद लंबे समय से किसी एक सॉफ्टवेयर से काम लेते-लेते एक खास किस्म की एफिनिटी जुड़ जाती है. नए इंटरफेस को समझने की कवायद मुश्किल जान पड़ती है. और काम तो चल ही रहा है तो क्यों झंझट में पड़ा जाए?

सन् २००० में जब हमने अपना पहला ई मेल आई डी बनाया था तब दो ही मुख्य ब्राउजर मैदान में होते थे. एक इंटरनेट एक्स्प्लोरर जो कि विंडोज के साथ प्री इंस्टाल्ड आता था और दूसरा नेट्स्केप नेविगेटर जो कमजोर प्रतिद्वंदी था और धीरे-धीरे पिछड़ता चला गया. IE का एकछत्र राज्य हो गया. जल्दी ही कई सारी परेशानियाँ भी सामने आने लगीं. सबसे बड़ी दिक्कत थी पॉप-अप विंडोस की जो बिना इजाजत टप्प से खुलकर विज्ञापन परोसने लगती थीं. फिर IE के सुरक्षा प्रबंधों की खामियों की रिपोर्ट्स आने लगी. कई सारे सिक्योरिटी होल्स की वजह से ये हैकर्स का आसान निशाना था. (अब भी है.)

फ़िर एक दिन (शायद २००२ में) पता चला नेट-केप्टर के बारे में. यह एक शानदार ब्राउजर था जो कि काम तो मूल रूप से IE के ही प्लेटफॉर्म पर करता था पर यूजर को एक नए खूबसूरत इंटरफेस के अलावा कई नए फीचर्स देता था. पॉप-अप ब्लॉकर के साथ साथ पहली बार टैब्ड ब्राउजिंग की सुविधा भी इसमें पायी. (टैब्ड ब्राउजिंग जैसी चीज को अपनाने में IE को और कई साल लगे और वर्जन ७ में जाकर वो इसे दे पाए हैं.) तुंरत ही नेट-केप्टर हमारा मनपसंद ब्राउजर बन गया.

कई और अच्छे ब्राउजर उसके बाद आए - अवंत ब्राउजर, एडवांस्ड ब्राउजर आदि, पर अगला पड़ाव जिस पर हम रुके वो था MyIE. बाद में इसका नया वर्जन MyIE 2 नाम से आया और अंततः इसका नाम हो गया मैक्सथन. ये भी एक जबरदस्त ब्राउजर है.

पर IE के लिए अगर कोई चुनौती बन कर आया तो वो है फायरफॉक्स. साथ ही ऑपेरा ने भी अपनी आमद दर्ज कराई. नेट्स्केप नेविगेटर भी बाजार में बना हुआ है. इसके अलावा एक ब्राउजर जो हमें पसंद आया वो है सफारी. पर इन सबके बीच जो पहली पसंद बन गया है वो है ऑपेरा.

अगर फीचर्स की तुलना करें तो सभी ब्राउजर्स लगभग समान रूप से सशक्त हैं. फायरफॉक्स और ऑपेरा के नए वर्जन्स (क्रमशः ३ और ९.५) इस वर्ष कुछ ही दिनों के अन्तराल पर जारी हुए हैं और कई सारी साइट्स पर इनकी तुलनात्मक विवेचना तकनीकी दृष्टिकोण से देखने को मिल सकती है. पर हम यहाँ बात करेंगे कि ऑपेरा हमें ज्यादा पसंद किन कारणों से है. आइये देखते हैं.

एक बात स्पष्ट कर दूं कि यहाँ मेरा उद्देश्य ऑपेरा की किसी एक अन्य ब्राउजर से तुलना करना नहीं है बल्कि उन फीचर्स की चर्चा करना है जिनके कारण यह मेरा पसंदीदा ब्राउजर है.

१. स्पीड डायल: ऑपेरा के मुख्य पृष्ठ पर नौ थम्बनेल आइकोंस एक तरह से तस्वीर वाले बुक-मार्क्स की तरह हैं. इन पर क्लिक करके आप किसी भी वेब-पेज को सिर्फ़ एक क्लिक से खोल सकते हैं. यह कई मायनों में सामान्य बुकमार्क्स से ज्यादा सुविधाजनक होता है.

२. तस्वीरों का प्रदर्शन डिसेबल करना: विंडो में नीचे की ओर दिए बटन पर क्लिक करके आप अपने ब्राउजर को टेक्स्ट ओनली मोड़ में ले जा सकते हैं. तस्वीरों के डाऊनलोड को डिसेबल करके आप न सिर्फ़ समय की बचत कर सकते हैं बल्कि डाऊनलोड होने वाले डाटा के अमाउंट की भी. इसी में एक बढ़िया चीज है केवल केश्ड इमेजेस को दिखाने का विकल्प. यानी अगर आपने एक बार पेज को तस्वीरों के साथ लोड होने दिया तो पेज की तस्वीरें केश मेमोरी में सेव हो जाती हैं. फिर अगली बार उसी पेज को खोलने पर बिना दुबारा तस्वीरों को इंटरनेट से डाऊनलोड किए पहले की तरह ही प्रदर्शित किया जा सकता है, (यदि इस बीच आपने अपनी केश मेमोरी साफ़ नहीं की हो तो.)

इसकी तुलना में अगर फायरफॉक्स में किसी पेज को कुछ समय अंतराल से दुबारा लोड करना हो तो सभी चित्र दुबारा इंटरनेट से डाऊनलोड होते हैं जो ज्यादा समय भी लेता है और खामखाह डाटा डाऊनलोड भी बढ़ता है.

हमने अपने ब्राउजर में डिफौल्ट सेटिंग में केश्ड इमेजेस का ऑप्शन सेलेक्ट किया हुआ है. (Tools >> Preferences... >> Web Pages >> Images {select cached images}) अगर किसी पेज पर देखने लायक तस्वीर हो तो मुख्य पृष्ठ पर दिए इस बटन पर क्लिक करके तुंरत तस्वीरें प्रदर्शित कर लेते हैं.

३. डिसेबल फ्लैश एनिमेशन: अधिकांश वेब पेजेस पर अब विज्ञापन फ्लैश फाइल्स के रूप में दिखाए जाते हैं. इन की तुलना टीवी के विज्ञापनों से की जा सकती है जिन्हें देखने के लिए आप समय भी खोटा करते हैं और ऊपर से जेब भी ढीली करते हैं. ऑपेरा में इन फ्लैश फाइल्स का डाऊनलोड बड़ी आसानी से रोका जा सकता है. कैसे?

Tools >> Quick Preferences >> Enable Plug-ins

ये बहुत कमाल का ऑप्शन है. काफ़ी सारा व्यर्थ का डाटा डाऊनलोड बचाता है, पेज लोडिंग को तीव्र करता है और डिसेबल/इनेबल करना भी बहुत आसान है.

४. अन्तःनिर्मित फीडरीडर: ऑपेरा का अपना ख़ुद का फीडरीडर है जिसमें आप अपने पसंदीदा ब्लॉग्स पर आने वाली नयी प्रविष्टी को सीधे पढ़ सकते हैं. अलग से कोई रीडर इंस्टाल करने की आवश्यकता नहीं.


५. माउस जेस्चर्स: एक समय था जब कि माउस में सिर्फ़ दो बटन हुआ करते थे. पेजेस को ऊपर नीचे करने के लिए स्क्रोलबार को घसीटना पड़ता था. फिर तीसरा बटन आया जो बाद में व्हील में बदल गया. अब पेज को स्क्रोल करने के लिए सिर्फ़ व्हील को घुमाना होता है. ये एक आदत लगाने वाली चीज है. एक बार व्हील माउस का उपयोग कर लेने के बाद आप शर्तिया उसके बिना काम नहीं कर सकते.

कुछ ऐसा ही कैची है ऑपेरा का माउस जेस्चर्स को रिकग्नाइज करने वाला फीचर. कई सारे छोटे छोटे काम जैसे नया टेब खोलना, पिछले या अगले पेज पर जाना आदि सिर्फ़ माउस से किए जा सकते हैं. उदाहरण के तौर पर पिछले पेज पर वापस जाने के लिए राइट बटन को (पेज पर कहीं भी) होल्ड करके माउस को थोड़ा सा पीछे की ओर घसीटना होता है. अगर फिर अगले पेज पर जाना हो तो राइट बटन को होल्ड करके माउस थोड़ा सा दायीं ओर घसीटना होगा.

इसकी इतनी आदत पड़ जाती है कि विंडोज के एक्स्प्लोरर में भी कभी कभी गलती से ऐसा करने की कोशिश कर बैठते हैं.

६. डाउनलोड मेनेजर: बेहतरीन काम करता है. एक साथ कई फाइल्स को डाउनलोड करना हो या किसी फाइल का डाउनलोड बीच में टूटने पर पुनः प्रारम्भ करना हो सारी सुविधाएँ मौजूद हैं. अगर सर्वर इजाजत देता हो तो डाउनलोड को बीच में पॉज भी कर सकते हैं और बचा हुआ डाटा बाद में कभी डाउनलोड कर सकते हैं.

इनके अलावा और भी कई खूबियाँ हैं जैसे कि टूलबार में हिन्दी को सपोर्ट करना (संजय बेंगाणी जी बता चुके हैं कि फायर फॉक्स यहाँ निठल्ला है), कम मेमोरी खाना, शीघ्र प्रारम्भ होना (अन्य की तुलना में), वेंड पासवर्ड मेनेजर आदि आदि.

और कुछ खामियां

लेकिन जहाँ इतनी अच्छाइयां हैं वहीं कुछ कमियों का होना भी लाजमी है. इनका जिक्र किए बिना बात पूरी नहीं होगी. सबसे बड़ी दिक्कत है कि गूगल ट्रांसलिटरेशन ऑपेरा पर काम नहीं करता. इसलिए हिन्दी में लिखने के लिए फायरफॉक्स की जरूरत बनी रहेगी जब तक कि इन्स्क्रिप्ट टाइपिंग में हाथ पूरी तरह सध नहीं जाता.

एक और परेशानी कभी कभी देखने में आती है. ब्लॉगर डॉट कॉम ने यह सुविधा दे दी है कि कमेन्ट की फील्ड को पोस्ट पेज पर ही प्रदर्शित किया जा सकता है. कई ब्लॉगर्स ने इसका उपयोग करते हुए ऐसा कर भी लिया है. हमारा अनुभव है कि कुछ ब्लॉग्स पर ऑपेरा से कमेन्ट करने में दिक्कत आ रही है. इस फील्ड में कमेन्ट करने से पहले एक आई डी को चुनना पड़ता है. पर ऑपेरा में ड्राप डाउन लिस्ट के ऑप्शन दिखते ही नहीं हैं. ऐसा सभी ब्लॉग्स पर नहीं होता पर कहीं कहीं होता है. उदाहरण के तौर पर ज्ञानदत्त जी के ब्लॉग पर यह परेशानी है मगर अजित वडनेरकर जी के यहाँ मामला टनाटन है. रवि रतलामी जी के एक ब्लॉग पर गड़बड़ है तो बाकी पर चकाचक. कारण-वारण अपन नहीं जानते पर कमेन्ट करना हो तो फिर फायरफॉक्स की शरण में जाना होता है.


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